बच्चों का सर्वांगीण विकास कैसे करें।।How to do all round development of children

 कुम्हार का चाक पर बर्तन बनाना एक अद्भुत अलाकृति है।पूरे लगन से गीली मिट्टी को मनचाहा रूप देना कमाल है।वह पूरे लगन और मेहनत से मिट्टी का वह रूप दे ही देताहै जो वह देना चाहता है।


          ठीक यही योगदान उन लोगों का है जो आपके जीवन को निखारने और सवारनें में अपना योगदान देते हैं। वे माता पिता भी हो सकते हैं, गुरु भी हो सकते हैं और आपके अगल बगल के वे लोग भी हो सकते हैं जो आपके शुभचिंतक हैं।

          जीवन में क्या बनना है इसकी तैयारी अगर बचपन से ही सुरू कर दिया जाय तो सफलता हासिल करना आसान हो जाता है।बच्चा तो आखिर बच्चा होता है ।उसे क्या करना है कैसे करना है कुछ भी पता नहीं होता है। जिस राह पर उसे छोड़ दीजिएगा उसी राह पर वो चला जायेगा।


           इसलिए बच्चे का समुचित विकास हो ,इसकी जिम्मेदारी माता पिता की होती है।माता पिता को अपने बच्चे का दोस्त बनकर पालन पोसन करना चाहिए।बचपन से ही खुलकर सब बात करना चाहिए ताकि बड़ा होने के बाद भी अगर किसी उलझन में हो तो आपसे खुलकर बात कर सके।अगर बचपन से ही डर के माहौल में रखियेगा तो आपसे अपने दिल की बात नहीं बता पाएगा और अंदर ही अंदर घुटता रहेगा।इस तरह उसके गलत दिशा में जाने का चांस रहेगा।

         कौन मां बाप नहीं चाहेगा की उसका बेटा लाईफ में अच्छा करे, प्रगति करे।इसके लिए हमेशा उसपर नजर रखनी होगी।उसके शौक को पूरा करें।उसके साथ कोई गेम खेलें।हर ओ काम करने का मौका दें जो वह करना चाहता है।अपनी बात या काम उसपर थोपें नहीं।साथ ही बातचीत , हसीं मजाक और खुलेपन के माहौल में उसके माइंड का रीड करें । समझें की उसका झुकाव किस तरफ है।पढ़ाई खेल संगीत कंप्यूटर इत्यादि।जिधर उसका माइंड ज्यादा चलता हो उसी शिक्षा की व्यवस्था करें इससे उस बच्चे को आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता है।


        दूसरी बात मां बाप को चाहिए की वे अपने बच्चों का आई कॉन बने। बच्चों को लगना चाहिए की आपसे अच्छा इंसान दूसरा कोई नहीं है। बच्चों को ये नहीं लगना चाहिए। की आपसे अच्छे तो उसके किसी दोस्त के मां बाप हैं।

        सबसे ज्यादा जरूरी बात ,अपने बच्चे की तुलना किसी दूसरे बच्चे से कभी भी ना करें।बहुत से लोग बात बात में अपने बच्चे से कहते हैं की "तुमसे अच्छा तो देखो गुप्ता जी का लड़का है।कितना पढ़ने में तेज है कितना आज्ञाकारी है इत्यादि"। ऐसी बात आप करेंगे तो आपका बच्चा हीन भावना का शिकार हो जाएगा अपने को दूसरों से कम कर आंकने लगेगा।


       सबसे महत्वपूर्ण बात, छोटी छोटी कामों में बच्चे की तारीफ करे। जब आप बच्चे की तारीफ करने लगेंगे तो उसका मनोबल बढ़ेगा।आप अपनी तरफ से ऐसा दिखाइए की आपकी नजर में आपही का बच्चा सब बच्चों से अच्छा है। आप हमेशा ध्यान रखिए की आपका बच्चा हीनभावना का शिकार न बने ।उसके मन में कुंठा पैदा न हो।

       ध्यान रहे की कभी भी उसे उसकी समस्याओं के साथ अकेला न छोड़ें।हमेशा एक अच्छे मित्र की तरह उसका मदद करे ।उसका मार्गदर्शन करें।उसके जीवन रूपी रथ का सारथी बनें।


     आरंभ में ही मैंने कुम्हार का जिक्र किया है। जिसतरह एक कुम्हार गीली मिट्टी को थपथपा कर ,सहारा देकर, ठोक बजा कर मिट्टी का बर्तन बनाता है।फिर उसे धूप में सुखाता है। अंत में आग में तपा कर उसे कठोर बनाता है।

       यही काम आपको करना है। जब आप अपने बच्चे को सहारा देकर ,थपथपा कर,ठोक बजाकर अपनी अनुभव की आग में तपा कर उसके मुकाम तक पहुंचा दीजिएगा तो आपके बच्चे का जीवन भी सुखमय हो जाएगा और आपको भी संतोष मिलेगा।

A potter's making pots on a wheel is a wonderful feature. It is wonderful to give the wet clay the desired shape with all the diligence. He gives the clay the form that he wants to give with all his dedication and hard work.


           This is precisely the contribution of those people who contribute in improving and riding your life. They can be parents, they can be gurus and they can also be people next to you who are your well wishers.

           If the preparation for what to become in life is started from childhood, then it becomes easy to achieve success. A child is a child after all. He does not know anything about what to do, how to do it. On whichever path you leave him, he will go on the same path.


            Therefore, the proper development of the child, it is the responsibility of the parents. Parents should nurture their child by becoming a friend. From childhood, everything should be talked about openly so that even after growing up, if there is any confusion, then you should openly ask for it. Can talk. If you keep in the atmosphere of fear since childhood, then you will not be able to tell your heart to you and will keep suffocating inside. In this way, there will be a chance of going in the wrong direction.

          Which parent does not want his son to do well in life, progress. For this always keep an eye on him. Fulfill his hobbies. Play a game with him. Give everyone a chance to do whatever he wants to do. Do not impose talk or work on him. Also read his mind in an atmosphere of conversation, laughter and openness. Understand which side he is inclined towards. Study, play music, computer etc. Wherever his mind moves more, arrange the same education, no one can stop that child from moving forward.


         Secondly, parents should be the Icon of their children. Children should feel that there is no other person better than you. Children should not feel this. That better than you are the parents of a friend of his.

         The most important thing is, never compare your child with any other child. ". If you do such a thing, then your child will become a victim of inferiority complex, he will start estimating himself from others.


        Most importantly, praise the child in small acts. When you start praising the child, then his morale will increase. Show from your side that in your eyes your own child is better than all the children. Always keep in mind that your child does not become a victim of inferiority complex. Frustration should not arise in his mind.

        Take care never to leave him alone with his problems. Always help him like a good friend. Guide him. Be the charioteer of his life's chariot.


      In the very beginning I have mentioned the potter. Just as a potter makes an earthen pot by patting wet clay, supporting it, thumping it. Then he dries it in the sun. Finally, by heating in the fire, it hardens.

        This is what you have to do. When you reach your child by supporting, patting, thumping and heating in the fire of your experience, then your child's life will also become happy and you will also get satisfaction.

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